जाट आरक्षण आंदोलन के बाद भड़की हिंसा के मामले में दाखिल पुलिस की चार्जशीट में कई खुलासे

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जाट आरक्षण आंदोलन के बाद भड़की हिंसा के मामले में पुलिस ने अपनी चार्जशीट दाखिल की और उसमें जो खुलासे किए गए हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं। चार्जशीट में आरोप लगाया है कि दलाल खाप के तत्कालीन प्रवक्ता मान सिंह दलाल और कांग्रेस की ग्रामीण इकाई के पूर्व अध्यक्ष जयदीप धनखड़ सांपला व एमडीयू के गेट नंबर दो के सामने जाम में शामिल रहे लोगों के संपर्क में थे।

जांच टीम ने जाम के दौरान डंप की गई कॉल और उनकी डिटेल को सुबूत के तौर पर शामिल किया। वीरवार को प्रो. विरेंद्र, मान सिंह दलाल और जयदीप धनखड़ की सीजेएम कोर्ट में पेशी हुई। पेशी के दौरान दलाल व धनखड़ को अदालत ने 1-1 लाख के मुचलके पर स्थाई जमानत दे दी। अब तक दोनों अग्रिम जमानत पर थे। अब मामले की अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी।

याद रहे कि फरवरी 2016 में प्रदेश में जाट आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन चला। आंदोलन के दौरान प्रदेश के रोहतक, सोनीपत, झज्जर, भिवानी, जींद, हिसार व दूसरे जिलों में जाम लगा दिया गया। साथ ही कई जिलों में हिंसक घटनाएं हुईं। हिंसा के बाद भिवानी निवासी कैप्टन पवन ने रोहतक पुलिस को शिकायत दी कि एक ऑडियो निजी न्यूज चैनल पर चली है।
उसमें पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रो. विरेंद्र सिंह दलाल खाप के प्रवक्ता मानसिंह दलाल से बातचीत कर रहे हैं। बातचीत में कह रहे हैं कि देशवाली खाप में तो ठीक है, लेकिन सिरसा बेल्ट में कुछ नहीं। आरोप है कि इससे आंदोलन हिंसात्मक हो गया। पुलिस ने प्रोफेसर विरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया था।

हालांकि उनको सेशन कोर्ट से स्थाई जमानत मिल गई। जबकि मानसिंह दलाल व जयदीप धनखड़ को अदालत ने अग्रिम जमानत दे दी थी। चार साल की जांच के बाद 2019 में पुलिस की तरफ से अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। अब 4 जुलाई को मामले की कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें दलाल व धनखड़ ने स्थाई जमानत मिल गई।

20 लोगों को बनाया गया गवाह, ज्यादातर पुलिसकर्मी
पुलिस की तरफ से मामले में 20 लोगों को गवाह बनाया गया है, जिसमें ज्यादातर पुलिसकर्मी शामिल हैं। सूची में शिकायतकर्ता भिवानी निवासी कैप्टन पवन कुमार के अलावा गुप्तचर विभाग व न्यूज चैनल के अधिकारियों का भी नाम है।

अदालत के दिए बयान चार्जशीट में शामिल

सिविल एसएचओ की तरफ से तैयार की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि जब जांच टीम ने प्रो. विरेंद्र से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वे कांग्रेस पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं और पूर्व सीएम का राजनीतिक सलाहकार रहा हूं। 18 फरवरी 2016 को चंडीगढ़ किसी को कांग्रेस पार्टी में शामिल होना था। कार्यक्रम के बाद वह जयदीप धनखड़ के साथ गाड़ी में आ रहा था। रास्ते में धनखड़ के मोबाइल पर मानसिंह दलाल से बातचीत की थी। इसके बाद वह दिल्ली आ गया।

इसके अलावा अलग-अलग लोगों से बातचीत की। नंबर उसकी डायरी में लिखे हैं, डायरी पंचकूला स्थित रिहायशी मकान में है। साथ ही जांच टीम ने प्रोफेसर के 19 मार्च 2016 को अदालत में दिए उन बयानों की कॉपी भी चार्जशीट में लगाई है, जिसमें प्रोफेसर की तरफ से अदालत में बयान दिया कि टीवी पर चली आडियो क्लिप में उसकी आवाज है। ऐसे में आवाज के सैंपल देने की आवश्यकता नहीं है।

जांच रिपोर्ट: धनखड़ व दलाल ने की जाम में सक्रिय लोगों से बातचीत
पुलिस की चार्जशीट में बताया गया है कि मान सिंह दलाल और जयदीप धनखड़ के मोबाइल नंबरों की सांपला और एमडीयू के गेट नंबर दो पर लगे जाम के दौरान सक्रिय रहे लोगों से बातचीत सामने आई है। क्योंकि दोनों के नंबरों की काल डिटेल निकाली गई तो ऐसे नंबरों से बातचीत पाई गई, जो मौके डंप किए गए नंबरों में भी हैं। ऐसे में साफ है कि जाम में दोनों की भूमिका रही। ऐसे लोग आसपास के गांव व एरिया से हैं।

सेशन कोर्ट में चलेगा ट्रायल
वीरवार को अदालत में जयदीप धनखड़ व मानसिंह दलाल को स्थाई जमानत मिल गई। 12 जुलाई तक बचाव पक्ष को चार्जशीट की पूरी कॉपी मिल जाएगी। इसके बाद केस सेशन कोर्ट में ट्रायल के लिए चला जाएगा। अब तक केस सीजेएम कोर्ट में चल रहा है।
– एडवोकेट सुनील कुमार, बचाव पक्ष वकील

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