हरियाणा में कांग्रेसियों को जोधपुर हाउस की मीटिंग के नतीजों का इंतजार

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हरियाणा में कांग्रेस दिग्गजों की खींचतान बढ़ती जा रही है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस दिग्गजों की इस खींचतान से पार्टी को राजनीतिक नुकसान होना तय है। हाईकमान के ढीले रुख को  भांपते हुए हुड्डा समर्थकों ने जहां अपने नेता पर कोई ठोस निर्णय लेने का दबाव बढ़ा दिया, वहीं बाकी कांग्रेस नेता राज्य में भाजपा को कड़ी चुनौती नहीं दे पा रहे हैं। कांग्रेस दिग्गजों की यह खींचतान सत्तारूढ़ भाजपा को खूब रास आ रही है। पूरी स्थिति में कांग्रेस के आला नेताओं की दिल्‍ली के जोधपुर हाऊस में बैठक भी हो चुकी है और अब इसकेे नतीजों पर राज्‍य के कांग्रेसियों की नजरें लगी हैं।

राज्य के कांग्रेेस के दिग्गजों की खींचतान से बढ़ रही पार्टी की मुश्किलें

प्रदेश में अक्टूबर में विधानसभा चुनाव हैं, लेकिन कांग्रेस दिग्गजों ने अभी तक इसकी तैयारी शुरू नहीं की है। लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस दिग्गजों का हौसला पूरी तरह से टूट चुका। अब पार्टी हाईकमान पर राज्य में संगठनात्मक बदलाव का दबाव बनाया जा रहा है। राज्य में कांग्रेस आधा दर्जन गुटों में बंटी हुई है। पूर्व मुख्‍यमत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, अशोक तंवर, किरण चौधरी, रणदीप सुरजेवाला, कुलदीप बिश्‍नोई, कैप्टन अजय यादव और कुमारी सैलजा के धड़ों में बंटी पार्टी हरियाणा में भाजपा के सामने कोई चुनौती नहीं खड़ी कर पा रही है।

हाईकमान के रुख पर टिकी निगाह, अभी फील्ड में उतरने को तैयार नहीं दिग्गज

उधर हरियाणा में सिर्फ भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ-साथ इनेलो नेता अभय चौटाला ने भी अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। चौटाला ने अपने ढंग से फील्ड में सक्रियता हैं तो हुड्डा समर्थक चाहते हैं कि पहले अशोक तंवर का नेतृत्व बदलकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी जाएं। इसके पीछे दलील दी जा रही कि तंवर पिछले पांच सालों में संगठन तक नहीं खड़ा कर पाए।

सूत्रों के अनुसार 9 जून को दिल्ली में हुई हुड्डा समर्थकों की बैठक में कोई बड़ा फैसला होने वाला था। हुड्डा समर्थकों का दबाव था कि यदि हाईकमान उनकी बात नहीं मानता तो नई पार्टी का गठन कर लिया जाए, लेकिन दिल्ली के जोधपुर हाउस में इस मीटिंग से पहले कांग्रेस नेता आनंद शर्मा और अशोक गहलोत ने हुड्डा के साथ बातचीत की। तब इन दिग्गजों ने हुड्डा को सोनिया गांधी का संदेश देते हुए एक सप्ताह के भीतर उन्हें नेतृत्व सौंप देने का संकेत दिया। आनंद और गहलोत के साथ हुई मीटिंग के बाद हुड्डा के तेवर बदल गए थे और उन्होंने अपने समर्थकों की बैठक में मुद्दे की दिशा ही बदल दी। अब गहलोत और आनंद शर्मा की ओर से मिले संकेत को दूसरा सप्ताह शुरू हो गया, लेकिन अभी तक हुड्डा को प्रदेश की कमान नहीं सौंपी गई।

गहलोत और आनंद शर्मा की मीटिंग के बाद पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा की भी प्रियंका गांधी से मुलाकात हो चुकी है। उम्मीद की जा रही है कि इस सप्ताह कांग्रेस हाईकमान हरियाणा में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर कोई ठोस फैसला ले सकता है। यदि इस सप्ताह भी हाईकमान ने हरियाणा कांग्रेस के विवाद की अनदेखी की तो पार्टी कार्यकर्ताओं में आक्रोश बढ़ सकता है।

दूसरी तरफ हुड्डा का नेतृत्व स्वीकार नहीं करने वाले कुलदीप बिश्नोई ने हाईकमान में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। उनकी हाल ही में प्रियंका गांधी से मुलाकात हुई, जबकि रणदीप सिंह सुरजेवाला निरंतर राहुल गांधी के संपर्क में हैं। कुमारी सैलजा अभी चुप हैं, जबकि कैप्टन अजय यादव, किरण चौधरी और अशोक तंवर की निगाह भी हाईकमान पर टिकी हुई है।

उम्मीद की जा रही है कि जब तक कांग्रेस हाईकमान हरियाणा के कांग्रेसियों के विवाद का समाधान नहीं करता, तब तक पार्टी में जान आ पाना संभव नहीं हैं। हुड्डा समर्थकों ने हाईकमान को स्पष्ट कह दिया कि उन्हें हुड्डा के अलावा किसी दूसरे नेता का नेतृत्व स्वीकार नहीं है। ऐसा दबाव इसलिए बनाया जा रहा है, ताकि हुड्डा अपनी पसंद से टिकटों का आवंटन कर सकें।

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