गर्मी सीजन में कम पानी पीने से हो सकता हैं, हेपेटाइटिस-ए और ई का है खतरा

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भीषण गर्मी में अगर आप पानी कम पी रहे हैं तो संभल जाइए। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी खतरनाक सिद्ध हो सकता है। गर्मी के कारण बच्चों और बुजुर्गों में हेपेटाइटिस ए और ई का खतरा सबसे अधिक बढ़ रहा है। रोहतक पीजीआइ में औसतन 15 मरीज प्रतिदिन हेपेटाइटिस ए और ई से ग्रस्त आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि भीषण गर्मी में पानी कम पीने आदि समस्या के चलते लोगों को हेपेटाइटिस, लीवर संबंधी बीमारी, पेट संबंधी बीमारी, आंखों संबंधी बीमारियों से जूझना पड़ रहा है।

भीषण गर्मी के चलते इन दिनों तापमान अपने चरम पर पहुंच रहा है। इन दिनों गर्मी जनित बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या में 25 फीसद तक वृद्धि हुई है। इन सभी मरीजों में पानी और नमक की कमी अधिक होने के कारण वह बीमारी की चपेट में आ गए। इसके अलावा डायरिया के मरीजों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

प्रतिदिन पीएं कम से कम तीन लीटर पानी

विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार गर्मी के मौसम में पसीना अधिक निकलने से शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है। जिसके चलते मरीज को थकान, कमजोरी, तेज बुखार, बेहोश हो जाना और दौरा पड़ जाने की समस्या तक भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि प्रतिदिन तीन से साढ़े तीन लीटर पानी अवश्य पीया जाए। इसके अलावा रिक्शा चालक, मजदूर, किसान, पुलिसकर्मी व अन्य ऐसे लोग जो धूप में कार्य करते हैं, उनके लिए आवश्यक है कि वह पानी के साथ-साथ नीबू की शिकंजी का सेवन अवश्य करें, जिससे शरीर में पानी और नमक दोनों की पूर्ति की जा सके।

फास्ट फूड का सेवन भी नुकसानदायक

भीषण गर्मी के मौसम में फास्ट फूड का सेवन भी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। फास्ट फूड का सेवन अधिक होने से भी गर्मियों में लोगों की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। फास्ट फूड का सेवन करने से पेट तो भर जाता है, लेकिन शरीर को पर्याप्त मात्रा में एनर्जी नहीं मिल पाती है। जिसके चलते शरीर की कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है। इससे बच्चों व लोगों के शरीर के विकास पर प्रभाव पड़ता है। साथ ही अधिक फास्ट फूड का सेवन करने से थायराइड, पेट दर्द, उल्टी-दस्त, एसिड बनना आदि की बीमारी भी हो जाती है।

बच्चे और बुजुर्गों पर होता है अधिक असर

गर्मी के मौसम में सबसे अधिक असर बच्चों व बुजुर्गों पर होता है। बताया जा रहा है कि दोनों ही अवस्था में शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता जवानों की अपेक्षा कम होती है। जिसके चलते पानी और नमक की कमी का असर जल्दी होता है। ऐसे में लोगों को बच्चों व बुजुर्गों की सेहत का अवश्य ध्यान रखना चाहिए।

पीजीआइ में बढ़ी मरीजों की संख्या

भीषण गर्मी के चलते पीजीआइ में मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। स्थिति यह है कि मरीजों के पर्चा बनवाने से लेकर, डॉक्टर से परामर्श, दवाइयां लेने के लिए और जांच कराने के लिए मरीजों की लंबी कतार लग रही है। जिसके चलते सोमवार को मरीजों की संख्या 7722 दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि इस सीजन में मरीजों की यह संख्या अब तक की सबसे अधिक है।

41 डिग्री पर पहुंचा अधिकतम पारा

चिलचिलाती धूप के चलते अधिकतम तापमान 41 डिग्री के स्तर को छू गया है। सोमवार को अधिकतम तापमान 41 डिग्री तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री दर्ज किया गया। पूरे दिन चली गर्म हवाओं ने लोगों को घरों से बाहर निकलने पर खूब परेशान किया। स्थिति यह थी कि पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने के बाद भी धूप से त्वचा झुलसने जैसी स्थिति हो रही थी।

–पीजीआइ में गर्मी से जनित बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। गर्मी के कारण हेपेटाइटिस ए और ई के मरीजों की संख्या भी 15 मरीज प्रतिदिन पहुंच गई है। लोगों के लिए आवश्यक है कि अधिक से अधिक पानी व शिकंजी पीएं। फास्ट फूड और तले व तेज मसाले वाले खाने से परहेज करें। किसी भी बीमारी या असहज महसूस करने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें।

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